Wednesday, July 30, 2025

सौलफूल गीतमाला गायक कलाकारों को देता है मंच

पुराने गीतों की यादें हुई जीवंत


मुंबई : -
 हर इंसान में कोई ना कोई प्रतिभा जरूर छिपी होती है बस जरूरत होती है, उसे मंच देने की .ऐसी ही एक पहल के माध्यम से नवोदित और उभरते गायकों के लिए 8 वर्ष पूर्व नासिक में  स्व. अनिल भुता द्वारा स्थापित  सोलफूल गीतमाला के माध्यम से अब काफी सिंगर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे है!

कलाकारों को मंच तथा पहचान देने की गरज से प्रबोधनकार ठाकरे होल में  एडवाईजर दिलीप भुता, संयोजक प्रसाद पटनम, दिलीप देसाई, कल्पेश परीख, दिनेश धाबलिया, जापानी तकनीकी के केन्जर वाटर के डिस्ट्रीब्यूटर दिलीप शाह,युक्ति शाह की उपस्थिति में वौइस् ऑफ क्वीन का आयोजन किया गया जहाँ पर  गायक कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया.कार्यक्रम के प्रायोजक दिलीप देसाई ने बताया कि  गायकी के लिए कोई  उम्र की कोई सीमा नही है. हमारा प्रमुख उद्देश्य गायको को मंच देना है ! इस अवसर पर भरत मेहता,रमेश भाटिया सहित अनेक वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे

Saturday, July 26, 2025

मुंबई में होगा जीवदया प्रेमी "जैन रत्न जीवनलाल जैन चायवाले" का सम्मान-

ओसवाल जैन महासंघ व मरुधर का तहलका न्यूज़ नेटवर्क का आयोजन


मुंबई
- अखिल भारतीय ओसवाल जैन संघ महासंघ एवं मरूधर का तहलका न्यूज़ नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में इस बार फिर से 2482वें ओसवाल वंश महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 

अखबार के संपादक जगदीश मेहता ने बताया कि कार्यक्रम में जैन समाज के आईएएस, आईपीएस, आईआरएस अधिकारी, डॉक्टर्स, एडवोकेट्स, उद्योगपति एवं समाज के अनेक गणमान्य शामिल होंगे । इस अवसर पर बेरोजगारी, विवाह संबंधी समस्याएँ एवं समाज में बढ़ रहे आडंबर जैसे मुद्दों पर बुद्धिजीवियों द्वारा सार्थक मंथन होगा। बीते वर्ष की उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर भी  विवरण प्रस्तुत होगा। सरकारी योजनाओं की जानकारी हेतु दो प्रमुख संस्थाएँ भी उपस्थित रहेंगी।

27 अप्रेल को सुबह 9 बजे दादर (पूर्व)में स्थित स्वामीनारायण सभाग्रह में सुबह 9 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा।मेहता ने सभी समाजबंधुओं से विनम्र आग्रह है कि वे इस अवसर पर उपस्थित रहे।कार्यक्रम में मध्यप्रदेश नागदा के जीवनलाल जैन चायवाले को कोरोना काल मे उनके कार्यों व सामाजिक कामों हेतु सम्मानित किया जाएगा।

जैन को जर्नलिस्ट क्लब अध्यक्ष राजेश सकलेचा (भाईजी),पत्रकार व युथ फ़ोरम के अध्यक्ष दीपक जैन, भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव,राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी, युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा यादव,मनीष गुप्ता,सोहन वर्मा,सुनील सेठिया ,डॉ. हरीश शर्मा,संतोष सांवरिया,प्रेम कुमार वैद्य, इंद्रजीत सिंह चौहान, राघवेंद्र सिंह कुशवाहा, संतोष सिंह पवार,मुकेश विश्वकर्मा एवं भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट, अनंत श्री पौधा रोपण सामाजिक समिति के प्रवीण पाल बिल्लू भैया, बजरंगसिंह चौहान,जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष धर्मेंद्र बम, सुरेन्द्र कांकरिया, प्रकाश चंद्र  सांवेर वाले, दिलीप छिपानी, रवि  कांठेड़, अमरीक सिंह ,श्रेणिक बम, अमित बम प्रशांत नाहर, प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक चौहान , बृजेश बोहरा,मनीष ओरा, पत्रकार निलेश मेहता,मनोज सोनी,सुनील उपाध्याय, कपड़ा व्यापारी दीपक जैन,महेन्द्र जैन नाना, गगन बोहरा, कन्हैया चौधरी, महेंद्र सिंह पंवार, आदि ने जीवन लाल जैन को बधाई शुभकामनाएं प्रेरित की। विशेष,,चातुर्मास हेतु विराजित मुनि श्री का आशीर्वाद लेने के बाद मुंबई प्रस्थान किया।जीवदया प्रेमी जीवनलाल जैन को एकबार फिर बधाई।

राजस्थान मीटर गेज प्रवासी संघ की नई कार्यकारिणी घोषित

विमल रांका अध्यक्ष व सिद्धराज लोढ़ा उपाध्यक्ष


मुंबई।
वर्षो से राजस्थान के रेल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली संस्था राजस्थान मीटरगेज प्रवासी संघ की नई कार्य समिति 2025-30 के अध्यक्ष व कार्यकारिणी का चयन सर्वसम्मति से किया गया।

विमल रांका को फिर सर्व सम्मति से अध्यक्ष चुना गया।अन्य पदाधिकारियों में उपाध्यक्ष सिध्दराज एस लोढा,महासचिव सुकनराज एस परमार, सचिव निरंजन परिहार, नरेंद्र मंडोत, कोषाध्यक्ष - प्रविण एम गुंदेशा, कार्यकारिणी में सिद्धार्थ मुथा, विनोद लोढा,सुरेन्द्र राठोड,सज्जन रांका,दिलीप परमार, कांतिभाई कितावत,रमेश एम चोपडा,सुरेन्द्र वी राठोड,सज्जन एम रांका एवं दिलीप परमार को चुना गया।शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने बधाई दी हैं।

Thursday, July 24, 2025

सोचने के लिए मजबूर करने वाले मुद्दे हैं कहानी संग्रह वेश्या की बेटी में

 पुस्तक समीक्षा

नवीन कुमार की कृति में कुल 25 कहानियां हैं, हर कहानी पठनीय है


मुंबई :-
कहानी संग्रह वेश्या की बेटी में एक से बढ़कर एक कहानी है। इसमें कुल 25 कहानियां हैं। हर कहानी पठनीय है। एक कहानी पढ़ने के बाद दूसरी कहानी पढ़ने की लालसा बनी रहती है। हर कहानी की अपनी पृष्ठभूमि है। हरेक कहानी की अपनी सामाजिक संरचना है। भावनाओं और संवेदनाओं का संगम भी है। अलग-अलग कहानी में अलग-अलग मुद्दे हैं जो हमें सोचने के लिए मजबूर करते हैं। इन कहानियों में सामाजिक चिंतन है। कहानियों की यह भी विशेषता है कि इसकी भाषा बहुत सरल है जिससे कहानी पढ़ने में प्रवाह बना रहता है। एक सामान्य पाठक भी इसे पढ़ और समझ सकता है। हरेक कहानी का कैरेक्टर अपने आस पास का ही लगता है। इस किताब की एक और खासियत है कि इसकी प्रस्तावना फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने लिखी है।

लेखक पत्रकारिता क्षेत्र से आते हैं तो उनकी कहानियों में उसकी छाया है। खासकर विषयों को लेकर उनकी खोजपरक सोच दिखती है। कोरोना त्रासदी किसे याद नहीं होगा। उस त्रासदी को काफी संवेदनशील तरीके से कहानीकार ने पेश किया है। मुर्दाघर कहानी उसी त्रासदी की एक कहानी है। इसमें एक बेटे का अपनी मां के प्रति प्यार है जिसके लिए कोरोना के समय बेटे के अंदर मौत का खौफ खत्म हो गया है। वैसे भी मुर्दाघर लोग जाने से परहेज करते हैं। लेकिन एक बेटा इस मुर्दाघर में अपनी मां के लिए जो कुछ करता है वह सब इस कहानी में पढ़कर मानवीय त्रासदी को भी महसूस किया जा सकता है। कोरोना त्रासदी पर मुर्दाघर के अलावा एंबुलेंस को भी पढ़कर वह त्रासदी ताजा हो जाता है। 

कहानी वेश्या की बेटी में महिला और बेटी के दर्द को महसूस किया जा सकता है। समाज का ‌एक वर्ग किस तरह से महिलाओं को देखता है और उसकी नजर में औरत एक भोग की वस्तु है। लेकिन इस नरक में धकेली गई महिलाओं की छटपटाहट को देखने के साथ साथ स्त्री के मनोविज्ञान को भी समझा जा सकता है। एक वेश्या की अपनी बेटी को इस नरक से निकालने की संघर्ष की भी कहानी है। वह तमाम वेश्याओं की प्रतिनिधि हैं। उसका संघर्ष प्रेरणादायक है। उसकी बेटी ने शिक्षा का सहारा लिया और इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ शिक्षा को ही हथियार बनाया है। इसे आज की बेटियां इस्तेमाल करेगी। 

काली कहानी पढ़कर कोई भी भावुक हो सकता है। इसमें एक पशु और मनुष्य के बीच मानवीय रिश्ते को बताया गया है। इस रिश्ते को कोई भी महसूस कर सकता है। यह कहानी पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि मानवीय रिश्ते सिर्फ मनुष्य के बीच ही नहीं, पशुओं के साथ भी हो सकते हैं। काली गाय इस रिश्ते का एक उदाहरण बनी है। काली जिस परिवार में रहती है वहां तो उसका रिश्ता और अपनापन समाज को आकर्षित किया ही है और बाद में समाज ने इस रिश्ते को एक अलग रूप में स्थापित कर दिया। 

सुमेधा की जिद कहानी में सामाजिक विसंगतियां दिखती है। समाज में भेदभाव किस तरह से किसी का विकास रोक देता है उसे दर्शाया गया है। लेकिन सुमेधा ने अपनी जिद से जो राह चुनने का फैसला लिया है वह भी उसके समाज की महिलाओं को प्रेरित करने वाला है। किसी भी समाज में बदलाव के लिए ऐसे कठोर निर्णय लिए जाते हैं। सुमेधा ने बदलाव को एक नए राह पर लाने की कवायद की है। सरकार की बेरूखी से भी इसका समाजशास्त्र नहीं बदल रहा है। लेकिन सुमेधा ने बता दिया है कि समाज की लड़कियों को आगे आना ही पड़ेगा। सुमेधा की जिद एक परिवर्तनकारी निर्णय है। 

यह कहानी संग्रह नई दिल्ली के प्रकाशक न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है। इसका कवर पेज आकर्षक है। यह किताब अमेज़न पर भी उपलब्ध है। प्रकाशक ने इसे खूबसूरत तरीके से प्रकाशित किया है। इसकी हर कहानी पठनीय है और उसमें ऐसा प्रवाह है कि पाठक खुद को शामिल करने के लिए विवश रहेगा। इस कहानी संग्रह की सभी कहानियों में गहराई है। कहानीकार ने सभी कहानियों में सामाजिक और मानवीय मूल्यों को बखूबी पेश किया है। यह किताब हर किसी को पढ़ना चाहिए।