Wednesday, October 1, 2025

मीरा भाईंदर महानगर पालिका डीपी प्लान - मुंबई उच्च न्यायालय का निर्देश

सरकार को 30 नवंबर तक निर्णय लेने का आदेश


भायंदर :-
मुंबई उच्च न्यायालय ने मीरा भाईंदर के सुधारित मसौदा विकास आराखड़े (डीपी प्लान) में गंभीर प्रक्रियात्मक और कानूनी त्रुटियों के खिलाफ दायर याचिका पर महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। न्यायालय ने शासन को याचिकाकर्ताओं की सुझावों और आपत्तियों पर विचार कर 30 नवंबर तक निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

ज्ञात हो नए डी पी प्लान पर मीरा भायंदर कांग्रेस पार्टी ने मुंबई हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी।पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता मुझफ्फर हुसैन ने बताया कि हमने डीपी प्लान में त्रुटियों पर आपत्ति जताई है, जिससे भविष्य में बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी।

उन्होंने 12 मीटर सड़क निर्माण, 30 मीटर आंतरिक सड़कें, मेट्रो कारशेड, पार्किंग व्यवस्था, ट्रामा सेंटर, पशु अस्पताल, हेलीपैड, मेट्रो स्टेशन परिसर में पार्किंग सुविधा, उद्यान, खेल मैदान, स्कूल, सब्जी मंडी, मछली बाजार, श्मशान भूमि, कब्रिस्तान, पुलिस मुख्यालय, परेड ग्राउंड, पुलिस कॉलोनी आदि के लिए आरक्षण का सुझाव दिया था।

न्यायालय का निर्णय :

न्यायमूर्ति एस. सी. घुगे और न्यायमूर्ति अश्विन बोबे ने याचिकाकर्ताओं की सुझावों और आपत्तियों पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश शासन को दिया है।इस निर्णय से मीरा भाईंदर के विकास आराखड़े में नागरिकों की भागीदारी और पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल मिलता है।

मीरा भाईंदर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता प्रकाश नागणे ने कहा कि हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं। शहरी नियोजन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की भागीदारी से पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।यह याचिका केवल कानूनी लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ी गई थी।

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