Monday, December 15, 2014

बहुआयामी व्यक्तित्व थे मदनमोहन मालवीय

     
                                     बहुआयामी व्यक्तित्व थे मदनमोहन मालवीय 
मुंबई- बहुआयामी व्यक्तित्व थे मदनमोहन मालवीय जिन्होंने देश और समाज के उत्थान के लिए किसी से भी दान मांगने मैं शर्म नहीं की और इसी की बदौलत विश्व के सबसे बडे आवासीय बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय की स्थापना हुई.यह विद्यालय आज शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का भी सिंचन कर रहा हैं.
उपरोक्त विचार बांद्रा नेशनल कॉलेज मैं विश्व विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी व महामना मालवीय मिशन द्वारा आईजीत कार्यक्रम मैं सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने व्यक्त किये।152 वि जयंती पर बोलते हुए डॉ स्वामी ने कहा की बौद्धिक शिक्षा के साथ साथ आध्यात्मिक शिक्षा का भी मिश्रण होना चाहिए तभी विकास होगा।उन्होंने कहा की बड़ी दुखद परिस्थिति हैं की अंग्रेजो द्वारा किसी वास्तु को स्वीकार करने के बाद हम उसे स्वीकार करते हैं.स्वामी ने कहा की वर्तमान शिक्षा पद्धति प्राचीन मूल्यों का भी अनुसरण करे.गंगा नदी मैं बढ़ते प्रदुषण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए कड़े कानून बनाने की मांग की और यही मालवीयजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।शिक्षा मैं संस्कृत की पुरे जोर वकालत करते हुए उन्होंने कहा की रिसर्च से भी यह बात सामने आयी हैं की संस्क्रुत बोलने के बाद शरीर को जो ऊर्जा मिलती हैं उससे दिमाग का भी विकास होता हैं.
विश्व हिन्दू परिषद के सरंक्षक अशोक सिंघल ने कहा की संस्कृति ही सुख लाएगी।उन्होंने हिन्दुओं को एक होने की अपील की तो प्रसिद्ध शिक्षाविद समीर सोमैया ने कहा की वर्त्तमान मैं हम पढाई सिर्फ काम करने के लिए सीखा रहे हैं.हम इंसानियत के गुण नहीं दे रहे हैं.सोमैया ने कहा की शिक्षा के क्षेत्र मैं अच्छे सिद्धांतो को भी अमल मैं लाया जाये तथा अंग्रेजी के साथ साथ प्रादेशिक भाषाओं को भी उतना ही महत्व दिया जाये।उन्होंने कहा की उनके कॉलेज को विश्व विद्यालय का दर्ज मिला तो सबसे पहला काम यही होगा की वे अंग्रेजी के साथ स्थानीय भाषाओँ के साथ भी न्याय करें।इस अवसर पर आनंद शंकर पंड्या लिखित पुस्तक हिन्दू धर्म मानव कल्याण का विज्ञानं का विमोचन भी हुआ।
कार्यक्रम मैं भारत विकास परिषद के दिलीप माहेश्वरी,कन्हैयालाल खण्डेलवाल,लायन आर एस.मौर्या,युथ फोरम के अध्यक्ष दीपक आर.जैन अजित रस्तोगी सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे.                  

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